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इंदौर के सिटी बस ट्रांसपोर्ट की देश में सराहना:लेकिन ओवरलोडिंग और शाम को बसों का संचालन जल्दी बंद होने से यात्री परेशान

  • November 12, 2022
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इंदौर के सिटी बस ट्रांसपोर्ट की देश में सराहना:लेकिन ओवरलोडिंग और शाम को बसों का संचालन जल्दी बंद होने से यात्री परेशान

इंदौर का सिटी बस ट्रांसपोर्ट पूरे देश में सराहा जा रहा है। मगर इस सिटी बस ट्रांसपोर्ट की कुछ खामियां है। इन खामियों से इसमें सफर करने वाले भी परेशान है। यहां पढ़िए किन-किन खामियों से बस में सफर करने वाले यात्री परेशान है…

इंदौर में चलने वाली सिटी बसों में सबसे बड़ी परेशानी है ओवर लोडिंग की। ओवर लोडिंग के कारण कई यात्रियों को खड़े होकर सफर करना पड़ता है। ओवर लोडिंग के साथ-साथ कुछ रूट पर बस समय से पहले ही बंद हो जाती है। समय से पहले बसों के बंद होने से इन रूटों पर जाने वाले यात्रियों खासकर स्टूडेंट्स को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। रात में दूसरे वाहन भी नहीं मिलने के कारण ये समस्या और गहरा जाती है।

नियमित न होना बड़ी दिक्कत

शाम के वक्त अधिकतर बसों में स्टूडेंट्स अपने कॉलेज या कोचिंग से अपने-अपने घरों को लौटते है। इसमें भंवरकुआं क्षेत्र में इन स्टूडेंट्स की संख्या ज्यादा होती है। बात करें तेजाजी नगर से आईआईटी इंदौर जाने तक की तो यहां सबसे ज्यादा समस्या स्टूडेंट्स और यात्रियों को फेस करना पड़ती है। कुछ यात्रियों ने बताया कि शाम 7 बजे से पहले ही ये बसें बंद हो जाती है। इससे ग्रामीण इलाकों के स्टूडेंट्स को जाने के लिए परेशान होना पड़ता है। इस मामले में ये बात भी सामने आई कि जब कंट्रोल रूम के नंबर पर भेजने के लिए वीडियो बनाते है तो उन्हें अगली बार बस में ना बैठने देने की बात भी बस कर्मियों द्वारा कहीं जाती है।

कभी 8 बजे तो कभी 9 बजे होती है छुट्‌टी

स्टूडेंट रिया ने बताया कि रात में कई बार बस वाले बस नहीं रोकते है। कोचिंग क्लास की छुट्टी कई बार 8 बजे तो कई बार 9 बजे होती है। बस वाले खाली बस ले जाते है, लेकिन रोकते नहीं है। बस स्टॉप पर बस नहीं रोकी जाती है। बस स्टॉप के आगे जाकर वे बस रोकते है। कई बार हमें बस के पीछे दौड़ लगाना पड़ती है। स्टूडेंट का ये भी कहना है कि हमारे पास, बस का पास रहता है तो हमें बस कर्मचारियों द्वारा कमेंट भी दिया जाता है। पास वालों को वे राशन कार्ड बोलते है।

हादसे भी हो सकता है

बस में सफर करने वालों का कहना है कि बस आगे बढ़ाने की हड़बड़ाहट में बहुत बार बस, पैसेंजर को उतारे बिना ही आगे बढ़ जाती है जिसमें एक पैर सीढ़ियों पर और एक पैर नीचे रखा रहता है, जो हादसे का कारण भी बन सकता है। दूसरी सवारियों के चिल्लाने पर जब बस रुक जाती है तब भी कंडक्टर और ड्राइवर अपनी गलती को नहीं मानते।

पैसे पूरे पर अपने पैरों पर सफर

बस में सफर करने के लिए पैसे तो पूरे लिए जाते है, लेकिन ओवर लोडिंग के कारण रोजाना कई यात्रियों को खड़े-खड़े सफर करना पड़ता है। यानी बस के सफर के पैसे तो पूरे चुकाना पड़ रहे है, मगर सफर अपने पैरों पर खड़े होकर ही करना पड़ता है।

7 बजे से पहले ही बंद हो जाती है बस

वैसे तो शहर में कुछ दिन पहले नाइट कल्चर लागू हुआ, जिसके चलते रात में भी हर सुविधा प्राप्त हो सकती हैं लेकिन सिटी बस की बात करें तो तेजाजी नगर से IIT इंदौर तक जाने वाली बस 7 बजे से पहले ही बंद हो जाती है, जिस कारण कोचिंग जाने वाले छात्रों को उससे आगे जाने के लिए कोई साधन नहीं मिल पाता, बता दें की छात्र तेजाजी नगर तक तो बस से आ जाते हैं लेकिन उससे आगे जाने के लिए उन्हें घरवालों के या लिफ्ट के भरोसे रहना पड़ता है।

छात्राओं को साधन न मिलने से सुरक्षा की चिंता

तेजाजी नगर बस स्टॉप पर शराब का ठेका होने के कारण वहां रात में रुकने पर सबसे ज्यादा परेशानी छात्राओं को उठानी पड़ती हैं। बस 7 बजे से पहले ही उससे आगे नहीं जाती तो छात्राओं को वहीं उतरना पढ़ता है और जब तक वो अन्य साधनों का ( मैजिक या परिवार से किसी को बुलाने) का इंतजार करती हैं, तब तक उनका मन सुरक्षा की चिंता में सहमा रहता है। शराबियों की भीड़ और मनचलों के बीच खड़े रहना अपने आप में एक टास्क हैं, अगर बस देर रात भी उनके क्षेत्रों तक जाए तो उन्हें तेजाजी नगर स्टॉप पर उतरने की आवश्यकता नही होगी।

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