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अमित शाह के चार महारथी – यही होंगे 2024 के प्रभारी

  • September 7, 2022
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अमित शाह के चार महारथी – यही होंगे 2024 के प्रभारी

2024 में जीत की दिशा में कामकाज चलाने के लिए BJP ने इन नेताओं को प्रभारी बनाकर संगठन में पीढ़ीगत बदलाव भी हासिल कर लिया है, जिसके तहत पुराने वक्त के लोगों की जगह नई टीम गठित हो गई है.

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने अगले लोकसभा चुनाव की तैयारियों के सिलसिले में अहम बैठक की, और एक ही दिन बाद 2024 के लिए उनकी रणनीति आकार लेने लगी.

सूत्रों के मुताबिक, पार्टी के 61-वर्षीय अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को पद पर कार्यकाल विस्तार दिया जाएगा, जिनका तीन साल का कार्यकाल जनवरी में समाप्त हो रहा है. जे.पी. नड्डा केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ मिलकर पार्टी चलाते हैं, जिनके और PM नरेंद्र मोदी के दिमाग में स्पष्ट है कि ऐसा कोई नेतृत्व परिवर्तन नहीं होना चाहिए, जो BJP को एक अभूतपूर्व तीसरा कार्यकाल जीतने के रास्ते से विचलित कर सके.

जे.पी. नड्डा की अमित शाह और नरेंद्र मोदी, दोनों से ही अच्छी पटरी बैठती है, लेकिन सबसे अहम पहलू यह है कि जहां तक पार्टी के मामलात का सवाल है, उन्हें इस बात से कतई फर्क नहीं पड़ता कि लोगों की निगाह में हर फैसला अमित शाह ही करते हैं. पार्टी कार्यकर्ताओं और BJP के मंत्रियों के साथ कल आयोजित की गई BJP की मिशन 2024 बैठक में अमित शाह सामने रहे और संगठन के वर्चस्व का बखान करते हुए कहा कि इससे पार्टी सत्ता में बने रहने में सक्षम बनेगी. जे.पी. नड्डा ने खुशी-खुशी उनके पीछे रहना कबूल किया, जबकि BJP और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के बीच मज़बूत कड़ी माने जाने वाले बी.एल. संतोष ने भी एक प्रेज़ेंटेशन दिया, जिसमें उन 144 सीटों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिन पर पार्टी पिछले आम चुनाव में मामूली अंतर से हारी थी.

इसी हफ्ते इससे पहले, अमित शाह ने मुंबई की एक बहुप्रचारित यात्रा भी की, जिसमें उन्होंने नए सहयोगी एकनाथ शिंदे के साथ मुंबई के नगर निगम के चुनाव के दांव-पेंच पर चर्चा की. BMC, यानी बृहन्मुंबई नगर निगम का चुनाव अगले कुछ ही महीनों में होना है. यह बेहद रईस नगर निगम पिछले 37 साल से शिवसेना के कब्ज़े में है, और अब यहां उद्धव ठाकरे की ताकत और लोकप्रियता का टेस्ट होने जा रहा है, जिन्हें एकनाथ शिंदे और BJP के साथ आ जाने की वजह से पद छोड़ना पड़ा था. अमित शाह का मुंबई जाना इस बात को बल देता है कि BJP कार्यकर्ताओं के लिए वह एक चुनावी टोटका हैं, और उन्होंने BMC चुनाव के लिए दिए गए भावनात्मक भाषण में पार्टी कार्यकर्ताओं से उद्धव ठाकरे को सबक सिखाने का भी आह्वान किया.

2024 की बड़ी जंग के लिए BJP की सबसे अहम ताकत वह दृढ़ संकल्प है, जो गुजरात और हिमाचल प्रदेश के चुनाव जीतने के लिए उनके पास है. इन दोनों राज्यों में विधानसभा चुनाव इसी साल नवंबर से पहले होने हैं. अमित शाह के पास चार-सदस्यीय टीम है, जो संकटमोचक की भूमिका निभाते हैं – असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव, केंद्रीय शिक्षामंत्री धर्मेंद्र प्रधान और टीम के हालिया सदस्य सुनील बंसल, जिन्हें बेहद अहम भूमिका में RSS से महासचिव के रूप में भेजा गया है, और उन्हीं के पास पश्चिम बंगाल, तेलंगाना और ओडिशा जैसे अहम विपक्ष-शासित राज्यों का प्रभार है.

ये चारों संकटमोचक अपनी उम्र के सिर्फ छठे दशक में हैं, किसी को भी पीछे धकेलने से पीछे नहीं हटते, ऑपरेशन लोटस (निर्वाचित सरकारों को गिरा देने की BJP की कवायद) के तजुर्बेकार दिग्गज खिलाड़ी हैं, और इन पर अमित शाह को पूरा भरोसा है कि ये लोग लो-प्रोफाइल रहते हुए भी नतीजे दे सकते हैं. कांग्रेसी इतिहास होने के बावजूद हिमंत बिस्वा सरमा पर राजनैतिक नतीजों के मामले में नरेंद्र मोदी और अमित शाह भरोसा करते हैं, जिनमें बागी विधायकों को बेहद शॉर्ट नोटिस पर चार्टर्ड विमान तथा रिसॉर्ट उपलब्ध करवाना शामिल है. हाल ही में महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार को गिराने में हिमंत बिस्वा सरमा ने अहम भूमिका निभाई थी. जब 2015 में वह पार्टी बदलकर BJP में आए थे, उन्होंने पूर्वोत्तर भारत BJP की झोली में डालने का वादा किया था, और फिर सात में से छह पूर्वोत्तर सूबों में BJP सरकारों का ‘जुगाड़’ कर वादा पूरा भी किया. ‘ऑपरेशन लोटस’ के कथानक से सरमा इस कदर जुड़े हुए हैं कि झारखंड में उनके दिखने मात्र से राजनीतिक अनिश्चितता में डूबा सत्तारूढ़ गठबंधन अस्थिर हो उठा, क्योंकि उस वक्त इसी फैसले का इंतज़ार हो रहा था कि क्या खुद को खनन का पट्टा आवंटित कर बैठने के चलते मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पद छोड़ना होगा.

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