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 मन की पवित्रता के बिना ज्ञान और धन का सही उपयोग संभव नहीं

  • March 2, 2022
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 मन की पवित्रता के बिना ज्ञान और धन का सही उपयोग संभव नहीं

Indore News इंदौर। जब तक मन की शुद्धि नहीं होगी, हमारा ज्ञान और धन दोनों ही प्रभावी नहीं रहेंगे। हमारे पास चाहे जितना ज्ञान और चाहे जितना धन हो, मन की पवित्रता के बिना इनका सही उपयोग नहीं हो पाएगा। आद्य शंकराचार्य द्वारा रचित ‘सौंदर्य लहरी’ एक ऐसा अनुपम और दिव्य ग्रंथ है, जिसमें समूची सृष्टि और समाज के साथ मानव मात्र के लिए कल्याण का भाव है। यह ऐसा ग्रंथ है, जिसके पठन मात्र से मनुष्य के सभी तरह के रोग दूर होकर हर दृष्टि से उसका उद्धार संभव है। जिस तरह भोजन के एक-एक ग्रास से हमारी तृप्ति, भूख की निवृत्ति और शरीर की पुष्टि होती है उसी तरह ‘सौंदर्य लहरी’ के प्रत्येक श्लोक के मनन-मंथन से इसी तरह की अनुभूति होगी।

यह बात मैसूर योगानंदेश्वर सरस्वती मठ मैसूर के पीठाधिपति जगदगुरु शंकर भारती महास्वामी ने कही। वे गीता भवन सत्संग सभागृह में आयोजित एक गरिमापूर्ण समारोह में संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर शहर के सभी प्रमुख धर्मस्थलों से जुड़े संत, विद्वान एवं संस्कृत पाठशालाओं के वेदपाठी विद्वान तथा गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में मौजूद थे। खजराना गणेश मंदिर के पुजारी अशोक भट्ट, रणजीत हनुमान मंदिर के पुजारी दीपेश व्यास, सदगुरु अण्णा महाराज, महामंडलेश्वर स्वामी लक्ष्मणानंद महाराज, अखंड धाम के महामंडलेश्वर स्वामी चेतन स्वरूप, म.प्र. ज्योतिष एवं विद्वत परिषद के अध्यक्ष रामचंद्र शर्मा वैदिक आदि की उपस्थिति में महास्वामी ने दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का शुभारंभ किया। जिला कलेक्टर मनीषसिंह, गीता भवन ट्रस्ट के अध्यक्ष गोपालदास मित्तल, मंत्री राम ऐरन, अण्णा महाराज एवं पं. वैदिक ने प्रारंभ में उनका स्वागत शाल-श्रीफल एवं फलों की टोकनी भेंट कर किया।

मूल संस्कृत में दिए गए अपने संबोधन में महास्वामी ने कहा कि कर्नाटक स्थित वेदांत भारती के माध्यम से पूरे देश में आद्य शंकराचार्य द्वारा रचित ग्रंथों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से वे भारत यात्रा पर निकले हैं। भागवत ग्रंथ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि जैसे भोजन के एक-एक ग्रास से हमें तृप्ति, भूख की निवृत्ति और शरीर की पुष्टि मिलती है, उसी तरह शंकराचार्यजी द्वारा रचित ‘सौंदर्य लहरी’ ऐसा विलक्षण ग्रंथ है, जिसके मनन और मंथन से मनुष्य के हर तरह के कष्टों का निराकरण हो सकता है। इस ग्रंथ के श्लोकों में अज्ञान रूपी अंधकार को हटाने से लेकर शरीर के सभी तरह के रोगों से मुक्ति के मंत्र शामिल हैं।

केन्द्र सरकार ने अयोध्या में बन रहे राम मंदिर के साथ एक अनुसंधान एवं अध्ययन केन्द्र की स्थापना भी की है। इसी तरह मध्यप्रदेश सरकार ने भी ओंकारेश्वर में सांस्कृतिक एकता न्यास का गठन कर इस दिशा में सार्थक प्रयास प्रारंभ किए हैं। सरकार के इन प्रयासों में समाज की भागीदारी भी होना चाहिए। ‘सौंदर्य लहरी’ जैसे ग्रंथ संस्कृत के अलावा अन्य भारतीय भाषाओं में भी उपलब्ध हैं। यह अदभुत और अनूठा ग्रंथ है, जो मौत के भय से भी निवृत्ति दिला सकता है। अंत में आभार माना अपर कलेक्टर अजयदेव शर्मा ने।

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